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जेवर से धोलेरा तक प्लॉट खरीदने वालों के लिए चेतावनी—अधूरे कागज़ों पर निवेश से बचें

एयरपोर्ट और स्मार्ट सिटी के नाम पर प्लॉट बेचने से पहले कागज़ों की जांच जरूरी, प्राधिकरण की कार्रवाई ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली/जेवर/धोलेरा।
एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और स्मार्ट सिटी जैसी बड़ी परियोजनाओं के आसपास जमीन और प्लॉट में निवेश का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। लेकिन ऐसे इलाकों में जमीन खरीदने से पहले स्वामित्व, भू-उपयोग, लेआउट और संबंधित प्राधिकरण की मंजूरी की जांच करना बेहद जरूरी है।

जेवर एयरपोर्ट क्षेत्र में यमुना प्राधिकरण द्वारा अवैध कॉलोनियों के खिलाफ की गई कार्रवाई इसका एक उदाहरण है। सितंबर 2025 में प्राधिकरण ने झाझर और ककोड़ क्षेत्र में करीब 250 बीघा अधिसूचित जमीन को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई की थी। रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई में ऐरोनेस्ट कॉलोनाइजर, श्री राधा गौरी एनक्लेव और रुद्र प्रॉपर्टीज जैसी कॉलोनियों का उल्लेख किया गया था।

इससे पहले भी जेवर क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में खरीदारों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस जमीन पर प्लॉट बेचा जा रहा है, वहां कॉलोनी विकसित करने की कानूनी अनुमति वास्तव में मौजूद है या नहीं।

धोलेरा में भी दस्तावेजों की जांच जरूरी

गुजरात के धोलेरा क्षेत्र में भी जमीन निवेश से जुड़े विवाद और धोखाधड़ी के मामले सामने आ चुके हैं। सितंबर 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक मामले में करीब ₹14.71 करोड़ की कथित धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज हुई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार निवेश पर 2 प्रतिशत मासिक रिटर्न और जमीन से संबंधित दस्तावेजों का भरोसा दिया गया था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।

इसलिए किसी भी निजी प्लॉटिंग प्रोजेक्ट को केवल इस आधार पर वैध नहीं माना जा सकता कि वह ‘धोलेरा स्मार्ट सिटी’, ‘एयरपोर्ट के पास’ या किसी बड़ी सरकारी परियोजना के नजदीक बताया जा रहा है।

मिर्रिख के प्रोजेक्ट्स के बारे में कंपनी की वेबसाइट पर क्या दावा है?

मिर्रिख की वेबसाइट पर Mayur Greenz II को 76 बीघा का प्रोजेक्ट बताया गया है और वेबसाइट पर NA, NOC तथा Title Clear Plot जैसे दावे किए गए हैं।

इसी तरह Mayur Ananta II को कंपनी की वेबसाइट पर 55 एकड़ का प्रोजेक्ट बताया गया है और वहां भी NA, NOC तथा Title Clear Plot का उल्लेख है।

हालांकि किसी भी खरीदार को इन दावों को केवल विज्ञापन या वेबसाइट देखकर स्वीकार नहीं करना चाहिए। संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, प्रमाणपत्र और प्रोजेक्ट-विशिष्ट दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन जरूरी है।

JDA Developer को सरकारी प्राधिकरण न समझें

प्लॉट खरीदने वालों के लिए यह भी जरूरी है कि किसी निजी कंपनी के नाम में Developer/Authority/Development जैसे शब्द होने से उसे सरकारी विकास प्राधिकरण न समझा जाए।

यदि किसी निजी कंपनी से धोलेरा क्षेत्र में प्लॉट खरीदा जा रहा है, तो खरीदार को संबंधित जमीन के वास्तविक मालिकाना हक, NA आदेश, लेआउट/टीपी योजना, RERA स्थिति और रजिस्ट्री संबंधी दस्तावेजों की स्वयं जांच करनी चाहिए।

प्लॉट खरीदने से पहले इन 7 दस्तावेजों की जांच करें

1. 7/12 रिकॉर्ड और स्वामित्व प्रमाणपत्र
जमीन वास्तव में किसके नाम दर्ज है और विक्रेता को उसे बेचने का अधिकार है या नहीं।

2. Non-Agricultural (NA) आदेश
क्या जमीन का उपयोग कृषि से गैर-कृषि में कानूनी रूप से परिवर्तित किया गया है?

3. TP Scheme और Layout Approval
धोलेरा क्षेत्र में संबंधित योजना/प्राधिकरण के रिकॉर्ड और स्वीकृत लेआउट की जांच करें। जेवर क्षेत्र में संबंधित प्राधिकरण की स्वीकृति देखना जरूरी है।

4. RERA पंजीकरण की स्थिति
जहां RERA लागू होता है, वहां प्रोजेक्ट और एजेंट का पंजीकरण जांचें। केवल यह कहना कि जमीन ‘स्मार्ट सिटी’ क्षेत्र में है, अपने आप में RERA अनुपालन का प्रमाण नहीं है।

5. Registered Sale Deed/Lease Deed
केवल बुकिंग रसीद, एग्रीमेंट या भुगतान रसीद को मालिकाना हक का विकल्प न मानें।

6. Tax, NOC और अन्य स्वीकृतियां
संबंधित विभागों की बकाया स्थिति और जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्रों की जांच करें।

7. मौके पर वास्तविक विकास
कागजों के साथ जमीन पर जाकर देखें कि सड़क, बिजली, पानी, सीमांकन और अन्य सुविधाएं वास्तव में मौजूद हैं या सिर्फ ब्रोशर में दिखाई गई हैं।

कलमवीर मीडिया की अपील

प्लॉट खरीदने वाले किसी भी व्यक्ति को केवल एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे, स्मार्ट सिटी या भविष्य में कीमत बढ़ने के दावों के आधार पर निवेश नहीं करना चाहिए।

यदि कोई कंपनी खरीदार से कहती है कि “अभी कब्जा ले लीजिए, बाकी कागज़ बाद में हो जाएंगे”, तो खरीदारी रोककर पहले स्वतंत्र कानूनी और राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराना जरूरी है।

जेवर हो या धोलेरा—जमीन खरीदने से पहले कागज़ देखें, सरकारी रिकॉर्ड से सत्यापन करें और भुगतान से पहले स्वतंत्र कानूनी सलाह लें।

नोट: इस रिपोर्ट में किसी विशेष कंपनी या व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया जा रहा है। जिन कंपनियों/प्रोजेक्टों का उल्लेख है, उनके संबंध में किसी भी आरोप को आधिकारिक रिकॉर्ड, सक्षम प्राधिकरण के आदेश या न्यायिक निष्कर्ष से ही अंतिम रूप से सत्यापित माना जाना चाहिए।

J S Nehra

लेखन केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं को समाज तक पहुँचाने का माध्यम है। मेरी कोशिश है कि मेरी लेखनी लोगों को सोचने, समझने और सकारात्मक बदलाव की ओर प्रेरित करे।

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