ज्वलंत मुद्देदेश-दुनियाप्रशासनिक

सफाई अभियान और शौचालय योजना पर सवाल

न सफाई, न पानी… महिला शौचालय पर भी ताला, शहरों में समस्या ज्यादा?

कलमवीर मीडिया | स्थानीय संवाददाता

सरकार की ओर से स्वच्छता अभियान और शौचालय योजनाओं के माध्यम से लोगों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर कई स्थानों पर स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, संबंधित स्थान पर नियमित सफाई नहीं हो रही, पानी की व्यवस्था भी नहीं है और महिला शौचालय पर ताला लगा हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस सुविधा का उद्देश्य आम लोगों, विशेषकर महिलाओं को स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय उपलब्ध कराना है, उसका उपयोग ही नहीं हो पा रहा तो योजना का लाभ जनता तक कैसे पहुंचेगा?

क्या शहरों में समस्या और ज्यादा गंभीर है?

ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी सार्वजनिक शौचालयों की सफाई, पानी और रखरखाव की समस्या सामने आती रही है। बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में यदि शौचालय मौजूद होने के बावजूद साफ-सफाई और पानी की सुविधा नहीं है, तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है।

यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार से इस मद में धनराशि उपलब्ध नहीं होती? यदि धनराशि मिलती है तो उसका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है? क्या सफाई कर्मचारियों को पर्याप्त भुगतान और संसाधन नहीं मिल रहे, या फिर अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं है?

अधिकारियों की निगरानी पर भी सवाल

यदि सफाई और शौचालयों के रखरखाव के लिए कर्मचारी नियुक्त हैं तथा इसके लिए बजट भी निर्धारित है, तो महिला शौचालय पर ताला, पानी का अभाव और गंदगी जैसी स्थिति अधिकारियों के निरीक्षण में क्यों नहीं आती?

जरूरत है कि संबंधित विभाग केवल कागजों पर स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा करने के बजाय जमीनी निरीक्षण करे। शौचालयों की स्थिति, पानी की उपलब्धता, सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति और खर्च की गई धनराशि का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।

जनता पूछ रही है जवाब

सरकार पैसा देती है या नहीं?
अगर देती है तो पैसा कहां खर्च होता है?
सफाई कर्मचारी को भुगतान और संसाधन मिलते हैं या नहीं?
और यदि सब कुछ मिलता है तो अधिकारी निगरानी क्यों नहीं कर पा रहे?

इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन को देना चाहिए। क्योंकि सिर्फ शौचालय बना देना पर्याप्त नहीं है—उसकी नियमित सफाई, पानी और सुरक्षित उपयोग की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल निरीक्षण कराकर सफाई, पानी और महिला शौचालय की सुविधा बहाल करे तथा लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदारी तय करे।

J S Nehra

लेखन केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं को समाज तक पहुँचाने का माध्यम है। मेरी कोशिश है कि मेरी लेखनी लोगों को सोचने, समझने और सकारात्मक बदलाव की ओर प्रेरित करे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button