प्रीपेड मीटर के बावजूद 1.18 करोड़ का बिजली बकाया?

लैंडक्राफ्ट गोल्फ लिंक्स में साढ़े पांच घंटे बिजली गुल, अब जवाबदेही और पैसे के हिसाब पर सवाल
गाजियाबाद। लैंडक्राफ्ट गोल्फ लिंक्स टाउनशिप में बिजली आपूर्ति करीब साढ़े पांच घंटे बाधित रहने के बाद बिजली भुगतान व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार सोसायटी पर करीब 1.18 करोड़ रुपये का बिजली बकाया बताया गया और भुगतान के आश्वासन के बाद बिजली आपूर्ति बहाल हुई।
लेकिन इस पूरे मामले में निवासियों की ओर से एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया जा रहा है—जब फ्लैटों में प्रीपेड बिजली मीटर लगे हैं और बिजली का भुगतान पहले ही रिचार्ज के माध्यम से किया जाता है, तो इतनी बड़ी बकाया राशि आखिर कैसे बनी?
निवासियों का यह भी कहना है कि मेंटेनेंस की राशि भी बिजली भुगतान के साथ ही काटी जाती है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि निवासियों से प्राप्त बिजली और मेंटेनेंस की राशि किस खाते में जमा होती है और उसका भुगतान संबंधित बिजली कंपनी को समय पर क्यों नहीं किया गया।
पैसा और व्यवस्था जिसकी जिम्मेदारी, जवाबदेही भी उसी की
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है। यदि निवासियों से बिजली और मेंटेनेंस के नाम पर नियमित रूप से पैसा लिया जा रहा है और उस राशि के प्रबंधन की जिम्मेदारी किसी निर्धारित प्रबंधन संस्था/एजेंसी के पास है, तो उसी जिम्मेदार व्यवस्था को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पैसा कहां जमा हुआ, किस मद में खर्च हुआ और बिजली का बकाया क्यों बना।
निवासियों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जिसके हाथ में पैसा लेने और उसका प्रबंधन करने की जिम्मेदारी है, उसी से पूरे हिसाब-किताब और बकाये का स्पष्ट विवरण क्यों न मांगा जाए?
हालांकि, बिना आधिकारिक वित्तीय रिकॉर्ड के किसी व्यक्ति या संस्था पर पैसा हड़पने या गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाना उचित नहीं होगा। इसलिए सोसायटी प्रबंधन और संबंधित बिजली विभाग से दस्तावेजों सहित स्पष्टीकरण सामने आना जरूरी है।
आखिर 1.18 करोड़ रुपये का बकाया किसका है?
पूरे मामले में इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है—
- 1.18 करोड़ रुपये का बकाया किस अवधि का है?
- यह बकाया फ्लैटों की बिजली का है या कॉमन एरिया का?
- प्रीपेड मीटर होने के बावजूद बकाया किस खाते में बना?
- निवासियों से प्राप्त बिजली भुगतान की राशि किस खाते में जमा हुई?
- मेंटेनेंस के रूप में काटी गई राशि का कितना हिस्सा किस मद में खर्च हुआ?
- बिजली कंपनी को भुगतान समय पर क्यों नहीं किया गया?
- क्या सोसायटी के निवासियों को आय-व्यय और बैंक/भुगतान का पूरा हिसाब उपलब्ध कराया गया है?
- बिजली काटने से पहले निवासियों को बकाये के संबंध में क्या जानकारी दी गई थी?
कलमवीर मीडिया का सवाल
अगर निवासी पहले ही प्रीपेड मीटर के जरिए बिजली का भुगतान कर रहे हैं और मेंटेनेंस की राशि भी नियमित रूप से वसूली जा रही है, तो फिर 1.18 करोड़ रुपये का बकाया आखिर बना कैसे?
जिस व्यवस्था के पास पैसा जमा करने और उसका भुगतान करने की जिम्मेदारी है, क्या उस व्यवस्था से पूरा हिसाब और जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए?
लैंडक्राफ्ट गोल्फ लिंक्स के हजारों परिवारों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण जरूरत है—बकाये और प्राप्त धन का पारदर्शी हिसाब सार्वजनिक किया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।



